इंडिया न्यूज, नई दिल्ली :
Terror Funding Case : जम्मू-कश्मीर में आतंक के लिए फंडिंग मामले में लश्कर-ए-तैयबा के संस्थापक पाकिस्तानी आतंकी हाफिज सईद, हिजबुल मुजाहिदीन के प्रमुख सैयद सलाहुद्दीन, यासीन मलिक, शब्बीर शाह, मसरत आलम सहित अन्य के खिलाफ दिल्ली की एक अदालत ने आरोप तय करने का निर्देश दिया है।
न्यायालय ने इन आरोपियों पर यूएपीए की विभिन्न धाराओं के तहत यह निर्देश दिए हैं। इन पर जम्मू और कश्मीर राज्य में आतंकवादी और अलगाववादी गतिविधियों को बढ़ावा देने के लिए वित्त पोषण का आरोप है।
पटियाला हाउस कोर्ट स्थित विशेष न्यायाधीश प्रवीण सिंह की अदालत ने मामले पर सुनवाई करते हुए कश्मीरी राजनेता और पूर्व एमएलए राशिद इंजीनियर, व्यापारी जहूर अहमद शाह वटाली, बिट्टा कराटे, आफताब अहमद शाह, अवतार अहमद शाह, नईम खान, बशीर अहमद भट, उर्फ ? पीर सैफुल्ला सहित अन्य कई के खिलाफ भी विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज करने का आदेश दिया है।
अदालत ने अपने आदेश में यह निर्देश दिया है कि राष्ट्रीय जांच एजेंसी द्वारा पेश तथ्यों व साक्ष्यों के आधार पर आरोपियों के एक-दूसरे के साथ मिलकर जम्मू एवं कश्मीर में आतंक व अलगाव फैलाने का उद्देश्य सामने आया है। इतना ही नहीं, जांच एजेंसियां पाकिस्तानी आतंकी संगठन के नेतृत्व में आतंकवादी संगठनों को आतंक फैलाने के लिए धन मुहैया कराने को भी अपने साक्ष्यों से प्रमाणित किया है।
अदालत ने पूरे मामले पर सुनवाई तथा वस्तु स्थिति से अवगत होने के बाद कहा कि गवाहों के बयानों से ऐसा लगता है कि विभाजन के बाद इन आतंकी संगठनों का एक ही उद्देश्य रहा है कि जम्मू व कश्मीर राज्य को भारत से अलग करने का। (Terror Funding Case)
अदालत ने अपने निर्देश में यह स्पष्ट कहा है कि कई गवाहों ने आरोपी शब्बीर शाह, यासीन मलिक, जहूर अहमद शाह वटाली, नईम खान और बिट्टा कराटे को आॅल पार्टीज हुर्रियत कॉन्फ्रेंस (एपीएचसी) और जेआरएल के आपस में संबंधों का खुलासा किया है। अदालत ने कहा कि एक अन्य गवाह के बयान से यह स्पष्ट हो गया है कि रशीद से लेकर जहूर अहमद शाह वटाली तक पाकिस्तानी आतंकी संगठनों से घनिष्ठ रूप से संपर्क में रहे हैं।
अदालत ने कहा कि आरोपियों की तमाम टिप्पणियां आरोपपत्र पर सुनवाई के बाद इन आरोपियों पर मुकदमा चलेगा तो सबूतों पर विस्तृत चर्चा एवं अभियोजन व बचाव पक्ष को विस्तार से सुने जाने के बाद उस पर विश्लेषण करने के बाद जो फैसला होगा वहीं अंतिम और मान्य होगा।
राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) ने अपने आरोप में कहा कि आतंकी फंडिंग के लिए पैसा पाकिस्तान और उसकी एजेंसियों की ओर से भेजा जाता था। इतना ही नहीं राजनयिक मिशन का इस्तेमाल भी गलत मंसूबों को पूरा करने के लिए किया जाता था। अदालत ने पाया कि घोषित अंतरराष्ट्रीय आतंकवादियों और आरोपी हाफिज सईद द्वारा आतंकी फंडिंग के लिए पैसा भी भेजा गया था। (Terror Funding Case)
एनआईए ने अदालत को बताया कि लश्कर-ए-तैयबा (एलईटी), हिजबुल मुजाहिदीन (एचएम), जम्मू और कश्मीर लिबरेशन फ्रंट (जेकेएलएफ), जैश-ए-मोहम्मद (जेएम) आदि विभिन्न आतंकवादी संगठनों ने पाकिस्तान के आईएसआई के समर्थन से नागरिकों और सुरक्षा बलों पर हमला करके घाटी में हिंसा को अंजाम देकर पूरे इलाके में भय का माहौल बना दिया। जिससे घाटी का माहौल अस्थिर हो गया।
गौरतलब है कि इन आरोपों के सही साबित होने पर दोषियों को उम्रकैद की सजा से लेकर फांसी तक की सजा हो सकती है। इसके अलावा अदालत इन दोषियों पर आर्थिक जुमार्ना भी लगा सकती है। (Terror Funding Case)
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